न कर शुमार की हर शै गिनी नहीं जाती,
ये जिन्दगी है हिसाब से जी नहीं जाती
आकाश, नदिया, तारे, घर का आँगन, बारिश ,मिटटी की सोंधी सोंधी खुशबू
गरमा गरम चाय का प्याला
सीखने की शुरुआत हे दोस्तों .... ब्लॉग मे नया हूँ आपके सहयोग का अभिलाषी हूँ अभी सब बिखरा बिखरा है पर हम मिलकर इसे जमायेंगे जरुर
Monday, March 16, 2009
Subscribe to:
Comments (Atom)
